भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के ‘ब्लैक टाइगर’ से जुड़ी है जॉन अब्राहम की फिल्म रोमियो अकबर वॉल्टर की कहानी

जॉन अब्राहम की फिल्म 'रोमियो अकबर वॉल्टर' की कहानी रॉ के एजेंट 'ब्लैक टाइगर' से बहुत हद तक मेल खाती है। क्या आप जानते हैं कि कौन थे रविंद्र कौशिक जिन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 'ब्लैक टाइगर' नाम दिया था?

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भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के ‘ब्लैक टाइगर’ से जुड़ी है जॉन अब्राहम की फिल्म रोमियो अकबर वॉल्टर की कहानी
जॉन अब्राहम की फिल्म 'रोमियो अकबर वॉल्टर' रॉ एजेंट रविंद्र कौशिक की कहानी है! (फोटो- ट्विटर)

आजादी के बाद जब-जब देश में देशभक्ति का जिक्र आएगा तो रविंद्र कौशिक का जिक्र जरूर होगा। हो सकता है कि आपने यह नाम पहले सुना हो, लेकिन नहीं सुना है तो आपको जरूर जानना चाहिए कि कौन थे रविंद्र कौशिक जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। जॉन अब्राहम की फिल्म ‘रोमियो अकबर वॉल्टर’ 5 अप्रैल को रिलीज हो रही है। फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्म में जॉन भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (रॉ) के एजेंट की भूमिका में हैं। इस फिल्म को रॉ एजेंट रविंद्र कौशिक की कहानी बताया जा रहा है। हालांकि इससे पहले भी कई फिल्मों को उनके नाम पर दर्शकों के सामने परोसा जा चुका है।

रविंद्र कौशिक का जन्म 1952 में हुआ था। उन्हें बचपन से ही एक्टिंग का शौक था। इसी शौक ने उन्हें थिएटर जॉइन करवा दिया। थिएटर-एक्टिंग में सर्वश्रेष्ठ रहने की वजह से भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ की नजर उन पर पड़ी। ‘रॉ’ उन्हें ट्रेनिंग देती है और फिर सीक्रेट मिशन के लिए पाकिस्तान भेजती है। रविंद्र पूरी तैयारी के साथ पाकिस्तान जाते हैं। वहां वो धर्म बदलते हैं, नाम बदलते हैं और इस्लाम की शिक्षा तक लेते हैं। रविंद्र पाकिस्तान में नबी अहमद शाकिर नाम से पहचाने जाते हैं। बताया जाता है कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की आंखों में धूल झोंकने के लिए खतना तक करवा लेते हैं।

पाकिस्तानी सेना में मेजर बन जाते हैं रविंद्र कौशिक

पाकिस्तान में रविंद्र कराची यूनिवर्सिटी से एलएलबी करते हैं। जिसके बाद वह पाकिस्तानी सेना में शामिल हो जाते हैं और प्रमोशन पाकर वह मेजर तक बन जाते हैं। इस दौरान वह भारतीय खुफिया एजेंसी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां देते हैं, जिनकी मदद से भारत हमेशा पाकिस्तान पर भारी पड़ता था। इस दौरान उन्हें पाकिस्तानी लड़की अमानत से प्यार हो जाता है। वह अमानत से निकाह कर लेते हैं और उससे उनको एक बच्चा भी हुआ। भारतीय खुफिया एजेंसी के बीच उन्हें ‘ब्लैक टाइगर’ नाम से पहचाना जाने लगा। कहा जाता है कि उन्हें यह नाम तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने दिया था।

ऐसे सामने आती है रविंद्र कौशिक की असलियत

साल 1983 में ‘ब्लैक टाइगर’ को पकड़ लिया जाता है। दरअसल रॉ इनायत मसीह नाम के एजेंट को पाकिस्तान भेजती है। इनायत को रविंद्र कौशिक से मिलना था, लेकिन पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को इनायत के बारे में पता चल जाता है और वह उसे पकड़ लेती है। मसीह पूछताछ में उन्हें कौशिक के बारे में सब कुछ बता देते हैं। जिसके बाद कौशिक फरार हो जाते हैं और बचाव के लिए भारतीय एजेंसियों से मदद मांगते हैं। कहा जाता है कि भारतीय एजेंसी ने उन्हें देश वापस लाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके बाद उन्हें पकड़ लिया जाता है और सियालकोट जेल में कैद कर दिया जाता है।

रविंद्र कौशिक के देशप्रेम के आगे हार गया था पाकिस्तान

पाकिस्तानी पुलिस, खुफिया एजेंसी और सेना के अधिकारी कौशिक पर बेहद जुल्म ढाते हैं, लेकिन उन्होंने अपने किसी भी मिशन के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी। करीब दो साल तक पड़ोसी मुल्क के अधिकारी उन्हें टॉर्चर करते हैं, लेकिन कौशिक के देशप्रेम के आगे वह जरा भी टिक नहीं पाए। जिसके बाद उन्हें मियांवली जेल में बंद कर दिया जाता है। 1985 में उन्हें फांसी की सजा दी जाती है, लेकिन बाद में उनकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाता है। कहा जाता है कि साल 2001 में जेल में टीबी और दिल की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। गौरतलब है कि देश को ऐसे सच्चे सिपाही बहुत कम मिले हैं। इन सिपाहियों ने तो देश की हिफाजत में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन यह भी देश का दुर्भाग्य है कि इन सिपहसालारों पर मुसीबत आने पर राजनीति के चलते इनकी पहचान को ही हमेशा-हमेशा के लिए दफना दिया गया।

देखिए ‘रोमियो अकबर वॉल्टर’ फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान का वीडियो…

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Story Author: राहुल सिंह

उत्तराखंड के छोटे से शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखता हूं। वैसे लिखने को बहुत कुछ है अपने बारे में, लेकिन यहां शब्दों की सीमा तय है। पत्रकारिता का छात्र रहा हूं। सीख रहा हूं और हमेशा सीखता रहूंगा।

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