Thappad Movie Review: तापसी पन्नू की फिल्म थप्पड़ एक करारा जवाब है उनको जो थप्पड़ खाते हैं और मारते हैं

बस एक थप्पड़। बस इतना ही? अनुभव सिन्हा की फिल्म थप्पड़ (Thappad) ऐसी बेहतरीन पटकथा है, जो दर्शकों को सवाल करने पर मजबूर करता है जो, समाज में महिलाओं को क्षमा करना चाहिए और कुछ चींजे भूल जाना चाहिए।

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Thappad Movie Review: तापसी पन्नू की फिल्म थप्पड़ एक करारा जवाब है उनको जो थप्पड़ खाते हैं और मारते हैं
Thappad Movie Review

मूवी नाम: थप्पड़ (Thappad)

थप्पड़ डायरेक्शन: अनुभव सिन्हा

थप्पड़ कास्ट: तापसी पन्नू, पावैल गुलाटी

थप्पड़ स्टार्स: 4/5

बस एक थप्पड़। बस इतना ही? अनुभव सिन्हा की फिल्म थप्पड़ (Thappad) ऐसी बेहतरीन पटकथा है, जो दर्शकों को सवाल करने पर मजबूर करता है जो, समाज में महिलाओं को क्षमा करना चाहिए और कुछ चींजे भूल जाना चाहिए।

थप्पड़ फिल्म अमृता (तापसी पन्नू) की कहानी है, जो एक गृहिणी होने की जिम्मेदारी निभा रही है और अपने परिवार की देखभाल करती है। परिस्थितियों के कारण, कुछ समय बाद वह खुद के लिए खड़े होने का फैसला करती है, भले ही इसका मतलब उसके परिवार, उसके पति और मानसिक कंडीशनिंग की पीढ़ियों के खिलाफ जा रहा हो। एक थप्पड़ (Thappad) उसकी यात्रा के लिए उत्प्रेरक बनता है और एक ही समस्या के विभिन्न संस्करणों में पकड़ी गई कई अन्य महिलाओं की कहानियों के लिए एक रूपक है। क्या एक स्थिति दूसरे से बदतर है? या एक दूसरे का नेतृत्व करता है? यह एक ऐसा सवाल है जो अनुभव और उनके टीम, दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।

मुल्क (Mulk) और आर्टिकल 15 (Article 15) के बाद, अनुभव सिन्हा हमें एक और दिलचस्प कहानी से प्रभावित करते हैं जो इस फिल्म की कहानी ज्यादा फिल्मी नहीं है। थप्पड़ फिल्म के माध्यम से, निर्माताओं ने आलोचनात्मक रूप से कब्जा कर लिया और घरेलू हिंसा, शादी के बाद सहमति, अहंकार की लड़ाई, हकदारी और दिन-प्रतिदिन के समझौते जैसे वैवाहिक जीवन के मुद्दों के बारे में व्यापक रूप से बात की हैं। फिल्म दर्शाता है कि महिलाओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी महत्वाकांक्षाओं, पहचान को छोड़ दें और इसके लिए खुद को दोषी भी न समझें।

अभिनेत्री तापसी पन्नू (Tappsee Pannu) ने अपने किरदार (गृहिणी) को गरिमा, अनुग्रह और दृढ़ विश्वास के साथ निभाया है। जब वह परिवार की देखभाल कर रही होती है तब वह न तो कम स्त्री अधिकारवादी होती है और न ही जब वह तलाक के लिए केस दर्ज़ करती है। एक बहुत ही सुंदर दृश्य है जहां उसका पड़ोसी एक नई कार खरीदता है। उसका पति पड़ोसी के चरित्र पर भद्दी टिप्पणी करता है, वह सवाल पूछता है कि वह क्या करती है। अमृता (तापसे) एक शब्द के साथ जवाब देती है: मेहनात (कड़ी मेहनत)। तापसी (Taapsee) के इस जवाब ने दिल जित लिया और उसके चेहरे के भाव से आप भी जान जायेंगे की बिना वजह किसी पर ऊँगली उठाना कितना गलत होता है। फिल्म कि शुरुवत में तापसी हर चरण में विभिन्न भावनाओं से गुजरती है, लेकिन उनका प्रदर्शन बरक़रार रहता है और समान रूप से अवशोषित होता है।

तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) की फिल्म 'थप्पड़' (Thappad) का पोस्टर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। इस पोस्टर को लोग बहुत शेयर कर रहे हैं और करे भी क्यों नहीं, ये है ही इतना कमाल का! बहुत समय बाद शायद बॉलीवुड में पोस्टर में फिल्म की कहानी को इतना स्ट्रॉन्ग्ली पेश किया गया है। बता दें कि यह फिल्म डोमेस्टिक वॉयलेंस जैसे बड़े मुद्दे पर बनी है। इस फिल्म की टैग लाइन भी बहुत कुछ कहती है "थप्पड़: बस इतनी सी बात?" 

यदि हम सह-कलाकारों की बात करें तो उन्होंने ने भी इस फिल्म में अच्छा प्रदर्शन किया है। कास्टिंग टीम ने पावैल गुलाटी को इस किरदार के लिए चुनकर बहुत अच्छा काम किया है। वह बहुत निर्दयी, अहंकारी और पुरुष पात्रता में डूबा हुआ है। फिर भी वह तापसी जैसी अभिनेत्री के सामने अपने किरदार को लोगों के सामने दिखा पाए। वह पितृसत्तात्मक समाज के कई पुरुषों के वास्तविक, ईमानदार और एक संपूर्ण प्रतिबिंब की तरह दिखते हैं। तापसी के ऑन-स्क्रीन माता-पिता कुमुद मिश्रा और रत्ना पाठक शाह दर्शकों के लिए एक भेट हैं। वर्षों की रंगमंच पर आपको सीधे-साधे और साधारण टोन में बोलने वाले व्यक्ति को दर्शाता है। वे सर्वव्यापी हैं।

पिता के रूप में कुमुद मिश्रा (Kumud Mishra) जैसे हर लड़की पिता चाहती है। इस स्क्रिप्ट में रत्ना पाठक शाह (Ratna Pathak Shah) ने अपने किरदार में मासूमियत दिखाई है। कुमुद और रत्ना की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री बहुत अच्छी है। राम कपूर (Ram Kapoor ) इस फिल्म में वकील का किरदार निभा रहे है जो अपने क्लाइंट के जरूरतों का ध्यान रखता है। माया सराओ (Maya Sarao) ने तापसी के वकील का किरदार बहुत अच्छे से निभाया है।

थप्पड़ (Thappad) फिल्म समाज का एक मात्र प्रतिबिंब है। और जिस पल आप उन गुलाबी-रंग के चश्मे को एक तरफ सरका कर उसका सामना करने की हिम्मत जुटा पाओगे, उस दिन आप वास्तविकता का सामना कर पाओगे। फिल्म थप्पड़ किसी भी कम नहीं है। यह जो समाज में मौजूद है उसका सुंदर चित्रण है। लेकिन महत्वपूर्ण यह हैं कि अपना सम्मान पाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। सच कहूँ तो, यह दर्शकों के मुद्दे की गंभीरता को समझने के लिए है।

यहां देखें थप्पड़ का ट्रेलर 

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Story Author: Mamta Hatle



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