1983 वर्ल्ड कप से जुड़ी ख़ास बातें!

June 25, 2021

1983 वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम की ट्रेनिंग सत्र के दौरान मोहिंदर अमरनाथ ने मुख्य कोच की भूमिका निभाई। उन्होंने ही कपिल देव और सुनील गावस्कर के साथ मिलकर टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाज़ी क्रम को तय किया।

जिम्बाब्वे के खिलाफ टीम इंडिया को हार से बचाने के लिए कपिल देव ने नाबाद 175 रनों की पारी खेली। मजे की बात ये कि बीबीसी में हड़ताल के चलते कपिल देव की इस शानदार पारी की टीवी रिकॉर्डिंग नहीं हो पाई थी।

फ़ाइनल मैच में 'मैन ऑफ़ द मैच' चुने जाने पर मोहिंदर अमरनाथ को 600 पाउंड मिले थे।

वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय टीम में शामिल प्रत्येक खिलाड़ी को पूरे दौरे के लिए 12,500-12,500 रुपये दिए गए थे।

वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने पूरी टीम को दो लाख रुपये इनामी रकम देने की घोषणा की थी, लेकिन सुनील गावस्कर ने इस रकम को टिप्स कहते हुए लेने से मना कर दिया था।

भारतीय टीम को वर्ल्ड कप जीतने पर 20 हज़ार पाउंड की इनामी रकम मिली थी।

1983 में जब भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप खेलने के लिए गई तो उसके साथ ना तो कोई कोच था, ना ही कोई डॉक्टर और ना ही कोई फीजियोथेरेपिस्ट था।

1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में एक ऐसा खिलाड़ी भी मौजूद था जो अपने पूरे करियर में एक भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेल सका। उस खिलाड़ी का नाम सुनील वाल्सन है।

जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में जब टीम के लगातार विकेट गिर रहे थे उस समय भारत के कप्तान कपिल देव नहाने में व्यस्त थे।

कपिल देव ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें ठीक से याद भी नहीं कि उन्होंने साबुन उतारा था कि नहीं। उन्होंने खिलाड़ियों से पूछा कि क्या हुआ तो साथियों ने उन्हें बताया कि खिलाड़ी आ रहे हैं और जा रहे हैं।

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