सरकार की नाक के नीचे चल रहा था फर्जी जॉब इंटरव्यू, कृषि भवन से गिरफ्तार हुए आरोपी

ओएनजीसी में असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी दिलाने के नाम पर क्राइम ब्रांच ने रैकेट में शामिल मास्टरमाइंड के साथ - साथ बाकी आरोपियों की भी गिरफ्तार की है।

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सरकार की नाक के नीचे चल रहा था फर्जी जॉब इंटरव्यू, कृषि भवन से गिरफ्तार हुए आरोपी

क्राइम ब्रांच ने जॉब दिलाने के नाम पर करोड़ों का चुना लगाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। ओएनजीसी में असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी दिलाने के नाम पर क्राइम ब्रांच ने रैकेट में शामिल मास्टरमाइंड और मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डिवेलपमेंट के दो कर्मचारियों के साथ – साथ 7 और लोगों को गिरफ्तार किया हैं।

हैरानी वाली बात तो यह है कि सरकार की नाक के नीचे चल रहे इस रैकेट को लेकर किसी को भी जानकारी नहीं थी। इस रैकेट में गिरफ्तार हुए लोगों की पहचान जगदीश, संदीप कुमार,वसीम,अंकित गुप्ता,विशाल गोयल, सुमन सौरभ और किशोर कुणाल के तौर पर हुई है। इसके साथ ही इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के पास से 27 मोबाइल, 2 लैपटॉप,10 चेक बुक, जाली वोटर आईडी कार्ड और 45 सिम कार्ड बरामद किए हैं।

असिस्टेंट इंजीनियर के पद के नाम पर की ठगी
इस मामले में अडिशनल सीपी राजीव रंजन ने खुलासा किया है कि ओएनजीसी के जरिए वसंत कुंज थाने में बेरोजगार युवकों को ओएनजीसी में असिस्टेंट इंजीनियर के नाम पर जॉब दिलाने के नाम पर ठगी करने को लेकर शिकायत की थी। बाद में पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केस को दर्ज कर आगे की जांच करना शुरु कर दी।

बाद में डीसीपी भीष्म सिंह की देखरेख में पुलिस की एक टीम को गठित किया गया। वहीं, दूसरी और सब इंस्पेक्टर अरविंद अहलावत ने आरोपियों से जुड़ी सारी जानकारियों को निकाला। जानकारी में यह बात सामने आई कि यह गैंग आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर ठगी की जा रही थी। गैंग में मौजूद कोई भी सदस्य पीड़ित से मोबाइल पर संपर्क नहीं साधता था। काम पूरा हो जाने के बाद सभी आरोपी अपने मोबाइल और सिम कार्ड को पूरी तरह से नष्ट कर दिया करते थे।

चौकाने वाला खुलासा
इस केस की अच्छे से जांच करने के बाद मास्टरमाइंड किशोर कुणाल यानी रणधीर के ठिकाने के बारे में पुलिस को पता लगा। जानकारी प्राप्त होते ही पुलिस की टीम ने आरोपी के ठिकाने पर जाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मास्टरमाइंड से जानकारी प्राप्त करते हुए बाकि गैंग के मेंबर को गिरफ्तार किया गया।

सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि इस रैकेट में सरकारी कर्मचारी शामिल थे। इन दोनों सरकारी कर्मचारियों की मदद से ही मास्टरमाइंड कृषि भवन के भीतर किसी सीनियर अफसर के ऑफिस में फर्जी इंटरव्यू लिया करता था। साथ ही एक कर्मचारी का काम ऑफिस उपलब्ध कराने का होता था। जहां वह अपना रैकेट आसानी से चला पाते थे। जबकि बात करें दूसरे कर्मचारीकी तो वह इंटरव्यू में शामिल होने वाले लोगोंकी एंट्री कराने में मदद करता था।

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