Health Tips: लीची खाने से क्या वाकई में होता है दिमागी बुखार? जानिए डॉक्टर का इस बारे में क्या है कहना

मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur Lychee Deaths) में पिछले कुछ महीने में दिमागी बुखार की वजह से लगभग 100 बच्चों की मौत हो चुकी है। क्या लीची (Lychee Side Effects) वाकई में जानलेवा हो सकती है, जानिए डॉक्टर का इस बारे में क्या कहना है।

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Health Tips: लीची खाने से क्या वाकई में होता है दिमागी बुखार? जानिए डॉक्टर का इस बारे में क्या है कहना
लीची के क्या वाकई में जानलेवा हो सकती है?(फोटो: ट्विटर)

मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur Lychee Deaths) में पिछले कुछ महीने में दिमागी बुखार की वजह से लगभग 100 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके पीछे लीची को दोषी माना जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि लीची खाने से ये दिमागी बुखार हो रहा है और लोगों को इसे खाने से परहेज करने की सलाह दी जा रही है। लेकिन अब मुजफ्फरपुर के चाइल्ड स्पशलिस्ट डॉक्टर अरुण शाह ने इस बारे में अपनी राय रखते हुए इसकी सच्चाई बताई है।

इस बारे में लीडिंग वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया से बारे में बात करते हुए डॉ. अरुण शाह (Dr. Arun Shah) ने बताया कि इसके पीछे की असली वजह लीची (Lychee Side Effects) नहीं, बल्कि कुपोषण (Reason For Malnutrition) की वजह से हो रहा है। उन्होंने चाइल्ड स्पेशलिस्ट जोकाब जॉन के 2016 में हुए एक रिसर्च का हवाला देते हुए कहा-

हर कोई इस दिमागी बुखार के लिए लीची को दोषी ठहरा रहा है। लेकिन इसके पीछे असली वजह कुपोषण है। जिन बच्चों की मौत हुई है या जिनमें ये दिमागी बुखार के लक्षण दिख रहे हैं अगर आप उन बच्चों के बारे में जानकारी लेंगे तो आपको पता चलेगा कि वो काफी गरीब परिवार से आते हैं। वो इधर-उधर लीची के बगीचों में कड़ी धूप में घूमते रहते हैं।

इस दौरान उन्हें जो मिलता है वो बिना सोचें समझे खा लेते हैं। इस बीच वो सड़ी और कच्ची लीची खा लेते हैं। वो घर जाते हैं और खाली पेट ही सो जाते हैं। इस वजह से कई बार जब वो सुबह उठते हैं तो उनमें दिमागी बुखार के लक्षण नजर आते हैं। इसके लिए लीची अकेली जिम्मेदार नहीं ठहराई जा सकती है।

वहीं, उन्होंने लीची उन्होंने लीची के प्रभावों के बारे में बात करते हुए कहा-

लीची में एक एमसीपीजी नाम का एक टॉक्सिन होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है। कुपोषित बच्चों में शुगर लेवल कम होने की वजह से हाईपोक्लाइसिमिया बीमारी होती है। इसलिए लीची बस चीजों को बढ़ावा देने का काम करती है। ये पूरी तरह किसी भी बीमारी के लिए जिम्मेदार नहीं है। इससे लीची की खेती करने वाले गरीब किसानों को नुकसान हो रहा है।

डॉक्टर शाह ने सभी पेरेंट्स को ये हिदायत दी है कि वो इस बात का पूरा ख्याल रखें कि सोने से पहले उनके बच्चे खाना जरूर खाएं। इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी सलाह दी कि अपने बच्चों को लीची के बगान जाने से रोकें। डॉ. शाह ने बताया कि अगर आपके बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण जैसे तेज बुखार, बेहोशी और शरीर में मरोड़ दिखे तो अपने बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाए और इलाज शुरू कराएं। ध्यान रखें कि डॉक्टर जल्द से जल्द बिना देरी किए इलाज शुरू कर दें।

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Story Author: जागृति प्रिया

जागृति प्रिया
मुझे एंटरटेंमेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ, ट्रेंड और ब्यूटी की खबरें लिखना पसंद है। पाठकों को इनसे जुड़ी खबरों से अवगत कराती हूं। मैंने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद माखनलाल यूनिवर्सिटी से मास्टर इन जर्नलिज्म किया है।

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