दिवाली मनाने के पीछे भगवान श्रीराम के अलावा भी जुड़ी हैं कई कहानियां, जानिए ऐतिहासिक राज

दिवाली तो दीपों का त्योहार है। इस उजाले के पर्व की कई कहानियां हैं। राजा राम के अलावा कई कहानियां हैं जो कि महाभारत, मुगल काल से जुड़ी हुई हैं।

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दिवाली मनाने के पीछे भगवान श्रीराम के अलावा भी जुड़ी हैं कई कहानियां, जानिए ऐतिहासिक राज

दिवाली तो दीपों का त्योहार है। इस उजाले के पर्व की कई कहानियां हैं। जिसमें से एक तो राजा राम के अयोध्या लौटने का कारण तो सब जानते हैं। आमतौर लोग कह देते हैं कि राजा राम 14 साल बाद वनवास काट कर लौटे थे। इसके बाद दिवाली मनाना शुरू हो गया। इसके अलावा कई कहानियां हैं जो कि महाभारत काल से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा सिखों और दक्षिण भारत के लोगों से भी कई कहानियां हैं जो कि इसके रहस्य को बताती हैं। चलिए एक-एक कर हम सारी कहानियां जानते हैं।

7 नवंबर को पूरा देश दिवाली मना रहा है। हर साल की तरह इस साल भी लोग पटाखा छोड़ने के लिए कह रहे होंगे तो कुछ कई नसीहत दे रहे होंगे। यदि आप इन कहानियों को छोड़कर कोई ऐतिहासिक कहानी सुनना चाहते हैं। श्रीराम भगवान से हटकर दिवाली मनाने के कारण को जानने के लिए इच्छुक हैं तो फिर पढ़िए इन रोचक कहानियों को।

1-हनुमान के आने पर लौटी खुशी
लंबे समय बाद जब श्रीराम भगवान की खबर अयोध्यवासियों को नहीं मिली तो सब बेचैन हो गए। इसी बीच हनुमान ने जाकर लौटने की सूचना दी। भगवान राम जब असुरराज रावण को मारकर अयोध्या नगरी वापस आए तब नगरवासियों ने अयोध्या को साफ-सुथरा करके रात को दीपों से अयोध्या को जगमगा दिया था। तब से आज तक यह परंपरा रही है कि, कार्तिक अमावस्या के घोर अंधकार को दूर करने के लिए दिपक का पर्व मनाया जाने लगा।

2-राजा पृथ्वी की जान बची
दीपावली मनाने के पीछे यह कहानी शायद ही सुनी होगी आपने। एक बार राजा से ज्योतिषी ने कहा कि, कार्तिक की अमावस्या की आधी रात को तुम्हारा अभाग्य एक सांप के रूप में आएगा। यह सुनकर राजा ने अपनी प्रजा को आज्ञा दी कि, वे अपने घरों को अच्छी तरह से साफ करें और सारा शहर रात भर रोशनी से प्रकाशित किया जाए। रानी सर्प देवता का गुणगान करती व जागती रही। लेकिन दुर्भाग्यवस दीप बुझ गया और सांप ने राजा को डस लिया। परंतु सर्प देवता रानी की स्वर लहरी को सुनकर प्रसन्न हो गए। सर्प देवता ने रानी को एक वर मांगने को कहा तो रानी ने अपने पति का जीवन मांगा।

सर्प देवता राजा के प्राण वापसी के लिए यमराज के पास गया। राजा का जीवनमंत्र पढ़ा गया तो शून्य नंबर दिखाई दिया। यहां पर सांप ने बड़ी चतुराई से आगे सात नंबर डाल दिया। जब यमराज ने पत्र देखा तो कहा, लगता है कि मृत शरीर को अपने जीवन के 70 साल और देखना है। जल्दी से इसे वापस ले जाओ। सो सांप राजा की आत्मा को वापस ले आया। राजा के प्राण वापस आने पर उसी दिन से दीपावली का पर्व मनाया जाने लगा।

3-हिरणकश्यप का वध
एक पुरानी कथा के अनुसार यह मान्यता है कि इसी दिन दैत्यराज हिरकश्यप का वध किया गया था। इसकी मृत्यु के बाद प्रजा ने मिलकर दीप जलाए थे। तभी से दीपावली मनानी शुरू हो गई। ये वही राजा है जिसने प्रहलाद को आग में बैठा दिया था। हालांकि यहां पर होली मनाने का राज भी छुपा है। प्रहलाद के बचने पर हम होली भी मनाते हैं।

4-पांडवों के लौटने की खुशी
दिवाली का नाता महाभारत के पांडवों के साथ भी जुड़ा हुआ है। कौरवों ने शकुनी मामा के चाल की मदद से शतरंज के खेल में पांडवों का सब कुछ छीन लिया था। पांडवों को राज्य छोड़ कर 13 वर्ष के लिए वनवास जाना पड़ा। इसी कार्तिक अमावस्या को युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव वनवास के बाद अपने राज्य लौटे थे। उनके लौटने के खुशी में उनके राज्य के लोगों नें दीप जला कर खुशियां मनाई थी।

5-मुगल बादशाह जहांगीर
मुगल बादशाह जहांगीर ने सिखों के 6वें गुरु गोविंद सिंह सहित 52 राजाओं को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया था। जब गुरु को कैद से आजाद किया जाने लगा तो वे अपने साथ कैद हुए राजाओं को भी रिहा करने की मांग किए। गुरू हरगोविंद सिंह के कहने पर राजाओं को भी कैद से रिहाई मिली थी। इसलिए इस त्यौहार को सिख समुदाय के लोग भी मनाते हैं।

6-माता लक्ष्मी का सृष्टि में अवतार
हर बार दीपावली का त्यौहार हिन्दी कैलंडर के अनुसार कार्तिक महीने के अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इसी दिन समुन्द्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी जी ने सृष्टि में अवतार लिया था। यह भी मुख्य कारणों में से एक है। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसीलिए हर घर में दीप जलने के साथ-साथ हम माता लक्ष्मी जी की पूजा भी करते हैं। यह भी दीपावली मनाने का एक मुख्य कारण है।

7-अंतिम हिंदू सम्राट की जीत
अंतिम हिंदू सम्राट राजा विक्रमादित्य की कहानी भी दिवाली के साथ जुड़ी हुई है। राजा विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान सम्राट थे। वे एक बहुत ही आदर्श राजा थे और उन्हें उनके उदारता, साहस तथा विद्वानों के संरक्षणों के कारण हमेशा जाना जाता है। इसी कार्तिक अमावस्या को उनका राज्याभिषेक हुआ था। राजा विक्रमादित्य मुगलों को धूल चटाने वाले भारत के अंतिम हिंदू सम्राट थे।

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