EXCLUSIVE: करण ओबेरॉय को है आरोपी महिला से डर- कहीं मुझपर हमला न कर दे

टीवी एक्टर करण ओबेरॉय (Karan Oberoi) को झूठे रेप केस में क्लीन चिट मिल गयी और आरोपी महिला को जेल हो गयी थी लेकिन अब वो बेल पर बाहर है, ऐसे में करण ने हिंदीरश को बताया है कि उन्हें अपनी सेफ्टी की चिंता हो रही है

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EXCLUSIVE: करण ओबेरॉय को है आरोपी महिला से डर- कहीं मुझपर हमला न कर दे
करण ओबेरॉय (Hindi Rush)

बलात्कार और अश्लील वीडियो बनाने के झूठे मामले में फंसे करण ओबेरॉय (Karan Oberoi) ने कहा है कि अब जब आरोपी महिला जेल से बाहर है तो उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है| हिंदी रश ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के दौरान जब करण ओबेरॉय से पूछा कि महिला बेल पर है तो क्या उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “हाँ है! अगर मैं कहूं कि नहीं है तो गलत होगा| मैं जब भी बाहर निकलता हूँ तो आसपास देखता हूँ कि कोई ऐसा तो नहीं है जो मुझपर हमला कर दे? फोन आता है तो एकदम से मेरी जान सूख जाती है कि किसका फ़ोन हो सकता है? जैसे मुझे पहले भी धमकीभरे फोन आते थे वो मुझसे करवाती थी तो उस डर में मैं जी रहा हूँ| जबसे उन्हें बेल मिली है तबसे मुझे ये डर है|”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, ” लेकिन मेरे जो दोस्त और सपोर्टर्स हैं वो मुझे लेकर बहुत ही प्रोटेक्टिव हैं| उनकी वजह से मैं थोड़ा खुद को कंट्रोल कर पा रहा हूँ| लेकिन मैं इस ट्रॉमा के बारे में बात करके इसे बार-बार क्यों जी रहा हूँ? सिर्फ एक वजह से ताकि मेरे साथ जो हुआ वो किसी और के साथ ना हो| मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो मुझे तकलीफ हो रही है लेकिन जिनकी आवाज़ों को नहीं सुना गया इनके कहानियों, किस्सों को सामने लाना बहुत जरुरी है| इस वजह से लाखों ज़िन्दगियां बर्बाद हो रही हैं इसलिए मैं आपसे बात कर रहा हूँ| वरना सबसे पहले मैं किसी साइकैट्रिस्ट के पास जाता खुद को हील करता फिर बात करने की हिम्मत जुटाकर बात करता|”

करण ओबेरॉय (Karan Oberoi Interview) ने #MenToo पर भी बात की, ” अभी मुझे हिम्मत ही इसी बात से आ रही है कि बहुत से लोग हैं जिन्हें मेरी जरुरत है| मैं चाहता हूँ कि मैं भारत का वो आखिरी आदमी बनूँ जिसके साथ ये नाइंसाफी हुई है इसलिए हमने #MenToo शुरू किया है| #MenToo के बारे में आपको बता दूँ कि अगर आपका सवाल है कि ये किसी के खिलाफ है तो ऐसा नहीं है| ये जेंडर इक्वालिटी, जेंडर न्यूट्रियालिटी और जस्टिस के बारे में है| इसके माध्यम से हम यही कहना चाहते हैं कि किसी के खिलाफ कोई नकली केस नहीं होना चाहिए| दोनों पक्षों की बात सुनी जाए और तब जाकर कोई फैसला लिया जाए और किसी का गला बिना जाने कोई ना काटे|”

क्या आप करण की बात से सहमत हैं? कमेंट्स के ज़रिये बताइये|

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Story Author: श्रेया दुबे

श्रेया दुबे
खबरें तो सब देते हैं, लेकिन तीखे खबरों को मजेदार अंदाज़ में आपतक पहुंचाना मुझे बहुत अच्छा लगता है। पिछले चार साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। कुछ नया सीखने की कोशिश कर रही हूं। फिलहाल इंटरनेट को और एंटरटेनिंग बना रही हूं।

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